शिक्षक कैसे बने | How to Become A Teacher

शिक्षक कैसे बने | How to Become A Teacher

शिक्षक बनने की राह काफी व्यवस्थित है, लेकिन इसमें सफलता पाने के लिए आपको हर चरण की गहरी समझ होनी चाहिए। नीचे PRT, TGT, PGT और प्रिंसिपल बनने की पूरी प्रक्रिया, प्रमुख परीक्षाओं और करियर की संभावनाओं को विस्तार से पैराग्राफ के माध्यम से समझाया गया है



1. प्राइमरी टीचर (PRT) और इसके लिए अनिवार्य परीक्षाएं

प्राइमरी शिक्षक (PRT) बनने का पहला कदम 12वीं कक्षा को कम से कम 50% अंकों के साथ पास करना है। इसके बाद आपको प्रारंभिक शिक्षा में दो साल का डिप्लोमा करना होता है, जिसे अलग-अलग राज्यों में D.El.Ed, BTC या JBT के नाम से जाना जाता है। इस डिप्लोमा के बाद आप सीधे शिक्षक नहीं बन सकते, इसके लिए आपको पात्रता परीक्षा (Eligibility Test) उत्तीर्ण करनी होती है।


केंद्रीय स्तर पर 'CTET Paper 1' सबसे महत्वपूर्ण है। इसे पास करने के बाद आप केंद्रीय विद्यालय (KVS) और नवोदय विद्यालय (NVS) जैसी संस्थाओं में आवेदन करने के पात्र हो जाते हैं। यदि आप उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में शिक्षक बनना चाहते हैं, तो आपको UPTET और उसके बाद होने वाली 'Super TET' परीक्षा पास करनी होगी। PRT शिक्षक का मुख्य काम छोटे बच्चों में साक्षरता और बुनियादी गणितीय कौशल विकसित करना होता है।

2. टीजीटी (TGT) और बीएड की भूमिका

अगर आप मिडिल स्कूल (कक्षा 6 से 10) में पढ़ाना चाहते हैं, तो आपको 'Trained Graduate Teacher' यानी TGT बनना होगा। इसके लिए आपके पास उस विषय में स्नातक (Graduation) की डिग्री होनी चाहिए जिसे आप पढ़ाना चाहते हैं, जैसे कि हिंदी, गणित या विज्ञान। ग्रेजुएशन के साथ-साथ B.Ed (Bachelor of Education) की डिग्री अब अनिवार्य है।


TGT पद के लिए आपको 'CTET Paper 2' पास करना होता है। इस स्तर पर शिक्षक का चयन केवल पात्रता परीक्षा से नहीं, बल्कि एक मुख्य प्रतियोगी परीक्षा से होता है। जैसे KVS में TGT की अलग परीक्षा होती है और दिल्ली के स्कूलों के लिए DSSSB परीक्षा आयोजित करता है। इसमें आपकी विषय की गहराई और उसे समझाने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है।

3. पीजीटी (PGT) और विशेषज्ञता का महत्व

पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) स्कूल स्तर का सबसे वरिष्ठ शिक्षण पद है, जो कक्षा 11 और 12 के छात्रों को संभालते हैं। इसके लिए संबंधित विषय में मास्टर डिग्री (जैसे M.A, M.Sc या M.Com) और B.Ed होना आवश्यक है। PGT के लिए वर्तमान में CTET अनिवार्य नहीं है, लेकिन चयन प्रक्रिया काफी कठिन होती है।


KVS, NVS या राज्यों के शिक्षा बोर्ड PGT भर्ती के लिए लिखित परीक्षा के साथ-साथ साक्षात्कार (Interview) का भी आयोजन करते हैं। चूँकि PGT शिक्षक कॉलेज जाने वाले छात्रों को तैयार करते हैं, इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि उन्हें अपने विषय के साथ-साथ करियर गाइडेंस का भी अच्छा ज्ञान हो।

4. प्रिंसिपल बनने की प्रशासनिक यात्रा

प्रिंसिपल का पद केवल शैक्षणिक योग्यता से नहीं, बल्कि लंबे अनुभव और नेतृत्व क्षमता से प्राप्त होता है। एक प्रिंसिपल बनने के लिए आपके पास मास्टर डिग्री और B.Ed का होना अनिवार्य है। अधिकांश सरकारी और निजी संस्थानों में प्रिंसिपल बनने के लिए कम से कम 10 से 15 साल का शिक्षण अनुभव मांगा जाता है, जिसमें से कुछ वर्ष प्रशासनिक कार्य (जैसे उप-प्रधानाचार्य या विभाग प्रमुख के रूप में) का अनुभव होना चाहिए।


केंद्रीय विद्यालयों में प्रिंसिपल की भर्ती के लिए सीधी परीक्षा भी होती है, जिसमें 'School Administration' और 'Financial Rules' जैसे विषयों पर सवाल पूछे जाते हैं। एक प्रिंसिपल का काम स्कूल का अनुशासन बनाए रखना, शिक्षकों का मार्गदर्शन करना और शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाना होता है।

5. CTET, KVS और DSSSB को गहराई से समझें

शिक्षण करियर में CTET (Central Teacher Eligibility Test) एक प्रवेश द्वार की तरह है। यह परीक्षा साल में दो बार CBSE द्वारा आयोजित की जाती है और इसकी डिग्री अब जीवन भर (Lifetime) के लिए मान्य है। CTET केवल एक पात्रता परीक्षा है, यह नौकरी की गारंटी नहीं देती, लेकिन इसके बिना आप किसी भी प्रतिष्ठित स्कूल में आवेदन नहीं कर सकते।


जब आप CTET पास कर लेते हैं, तब आप KVS (Kendriya Vidyalaya Sangathan) की परीक्षाओं में बैठते हैं। KVS भारत के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक है जहाँ वेतन और सुविधाएं बेहतरीन होती हैं। इसी तरह, दिल्ली सरकार के स्कूलों में भर्ती के लिए DSSSB परीक्षा ली जाती है, जिसमें सामान्य ज्ञान, तर्कशक्ति और विषय-विशिष्ट ज्ञान का कड़ा मुकाबला होता है। नवोदय विद्यालय (NVS) ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए होता है, जहाँ शिक्षकों का चयन एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के माध्यम से किया जाता है।



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