अभ्यास का महत्व | Moral Story In Hindi

      अभ्यास का महत्व
           (Motivational Story In Hindi)


प्राचीन काल में लोग अपने बच्चों को गुरुकुल में विद्या प्राप्त करने के लिए भेजते थे। गुरुकुल में एक वरदराज नाम का बालक पढ़ता था। वरदराज पढ़ाई-लिखाई में काफी कमजोर था। 



गुरुकुल के सभी विद्यार्थी गुरु जी के प्रश्न का उत्तर देने के लिए तत्पर रहते थे लेकिन वरदराज किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाता था।


गुरूजी भी वरदराज को समझाने का प्रयत्न करते परन्तु वरदराज के कुछ भी समझ नहीं आता। गुरुकुल के सारे बच्चे वरदराज को मूर्खराज कहकर चिढ़ाते थे।


एक दिन गुरुजी ने गुरुकुल के सभी विद्यार्थियों को एक पाठ याद करने को कहा और अगले ही दिन गुरुकुल के सभी विद्यार्थी पाठ याद करके आते हैं और गुरूजी बारी-बारी से सभी विद्यार्थियों से पाठ सुनाने को कहते हैं।


सभी विद्यार्थी गुरूजी को पाठ सुना देतें हैं। परन्तु जब वरदराज की बारी आती है तो वरदराज को पाठ का एक शब्द भी याद नहीं होता है। जिसके कारण गुरूजी वरदराज को खूब डांट लगाते हैं और अगले दिन पाठ याद करके सुनाने को कहते हैं।


फिर अगले दिन वरदराज गुरुकुल पहुँचता है और गुरूजी वरदराज से वही पाठ सुनाने को कहते है लेकिन आज भी वरदराज गुरूजी को पाठ नहीं सुना पाता है और फिर से गुरूजी वरदराज को खूब जोर से डांट लगाते हैं।


गुरूजी के डांट लगाने के बाद वरदराज खुद को बेवकूफ और नसमझ समझने लगा और वरदराज समझने लगा कि विद्या उसके भाग्य में ही नहीं है और वो गुरुकुल से अपने घर भागने का निर्णय लेता है।


जब वरदराज गुरुकुल से भाग जाता है तब रास्ते में उसे भूख लगती है। भूख लगने पर वरदराज के पास मौजूद सत्तू खाने लगता है।


सत्तू खाने के बाद वह पानी पीने के लिए रास्ते में एक कुएं के पास जाता है और कुएं के पास रखी रस्सी के द्वारा कुएं में से पानी खींचकर पी लेता है।


पानी पीने के बाद वरदराज देखता है कि बार-बार रस्सी द्वारा पानी खींचने से  कुए के पत्थर पर गड्ढे पड़ गए हैं और कुएं की लोहे की घिरनी भी घिस घिसकर चिकनी हो गयी है, तब उसे अपने गुरुकुल की याद आती है और वह सोचता है कि जब एक कोमल सी रस्सी द्वारा कठोर पत्थर पर गड्ढे पड़ सकते हैं और लोहे की घिरनी भी घिस सकती है तो क्या मैं बार-बार प्रयत्न करने से पाठ को याद नहीं कर सकता। इसके बाद वरदराज घर जाने का निर्णय त्याग देता है और प्रण करता है कि पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई लिखाई करेगा।


गुरुकुल पहुंचने के बाद वरदराज पूरे मन से पढ़ाई करता है और बार-बार अभ्यास करके पाठ को याद करता है और बाद में गुरुकुल की परीक्षा में सबसे अधिक अंको से उत्तीर्ण होता है।


कहानी से सीख

(Moral Of The Story


दोस्तों, यह कहानी हमें यह बताने का प्रयास कर रही है कि हमें जिंदगी में कभी भी हार नहीं मानी चाहिए। दोस्तों, जिस प्रकार एक रस्सी द्वारा एक कठोर पत्थर कट सकता है उसी प्रकार बार-बार प्रयास करने से हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।


इन्हें भी पढ़ें -


Motivational Stories In Hindi For Students


Motivational Quotes

Motivational Poems

Post a Comment

0 Comments