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हार के आगे जीत है | लक्ष्य नाम की चिड़िया | दो जबरदस्त मोटिवेशनल कहानियां

ऐसी 2 बेहतरीन प्रेरणादाई कहानी जो आपको भीतर से मोटिवेशन से कूट कूट के भर देगी। दोस्तों मैं आपसे एक सवाल पूछता हूं कि हम ये मोटिवेशन कहानियां क्यों पढ़ते हैं? 


तो इसका जवाब होगा कि हमें motivational story पढ़ने से हमें दूसरों की गलतियों का पता चलता है और हम उन गलतियों को न दोहराए, इसलिए हमें ज्यादा से ज्यादा motivational story in hindi पढ़नी चाहिए।




हार के आगे जीत है
(Motivational Story In Hindi)


रामू धन्ना सेठ के यहां खेतीबाड़ी का काम करके अपने परिवार का गुजर बसर किया करता था। सेठ के यहां वो पिछले 3 सालों से काम कर रहा था। सेठ रामू पर बहुत भरोसा करता था।


एक दिन धन्ना सेठ के यहां चोरी हो जाती है और सेठ के 3 लाख रूपए सफा हो जाते हैं।


मणिलाल रामू से काफ़ी चिड़ता था, क्योंकि धन्ना सेठ हरदम रामू की ही तारीफ करता था और मणिलाल को ये बात पसंद नहीं थी।


अब, मणिलाल के पास रामू का हिसाब चुकता करने का अच्छा मौका मिल गया था। मणिलाल ने रामू के घर पर 2 लाख रूपए छुपा दिए और फिर सेठ के पास आकर धन्ना सेठ के कान भरने लगा।


धन्ना सेठ ने मणिलाल पर रत्ती भर विश्वास न करा।


लेकिन, मणिलाल के बहुत कहने पर वो मणिलाल के साथ रामू के घर पहुंचा तो उसे वो पैसे दिखे और रामू को धन्ना सेठ ने बुलाया।


रामू को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसके घर से इतने सारे पैसे आखिर आए कहां से।


रामू को धन्ना सेठ काम से निकाल देता है। रामू की चोरी की झूठी ख़बर पूरे रानीपुर गांव में पानी की तरह फैल जाती है।


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अब, रामू बेचारा पूरे गांव में बेवजह ही बदनाम हो चुका था। रामू जब भी बाजार से समान लेने जाता तो सब लोग उसको भेड़ी नज़र से देखते थे।


मानो रामू और उसके परिवार पर एक अजीब सा ही भूचाल आ गया हो।


अब तो बात यहां तक बढ़ गई थी कि गांव वालो ने रामू और उसके परिवार वालों से बोलना तक छोड़ दिया था।


अब, रामू हताश परेशान हो चुका था। उसे कोई काम भी नहीं मिल पा रहा था। घर में बस कुछ ही दिनों का राशन बचा था। 


रामू भीतर से हिम्मत हार चुका था और पूरी तरह से टूट चुका था।


रामू घर के बाहर घास फूंस उगी बेकार ज़मीन पर बैठकर रोज कुछ न कुछ सोचता रहता था। 


बस, उससे पूरे गांव में इकलौते गणेश काका ही बोला करते थे। जब रामू खेतीबाड़ी करता था तो वहीं पर काका बेकार घास फूंस काटने का छोटा मोटा काम किया करते थे।


दोनों अक्सर काम खत्म होने पर साथ में ही खाना खाते थे। उन दोनों की काफ़ी अच्छी दोस्ती थी।


गणेश काका से रामू की हालत देखी नहीं जा रही थी। वो चाहते थे कि रामू फिर से अपनी ज़िंदगी में खुशहाली भरें।


काका, रामू के पास जाते हैं। काका उसे परेशान होने की जगह कुछ काम धाम करने की नसीहत देते हैं।


रामू गुस्से में काका से कहता हैं " वाह! नसीहत देने आए हो, देख नहीं रहे यहां गांव में कौन हमसे बोलत तो हैं नहीं और तुम…."


काका रामू के गुस्से के बाद उसे घर के बहार पड़ीं बेकार घास फूंस उगी जमीन पर खेतीबाड़ी करने के लिए कहकर वहां से चले जाते हैं।


अगले दिन रामू जब काम पर जा रहे होते हैं तो उनसे कहता है "यौन ज़रा से जमीन के बेकार टुकड़े पर कौन खेतीबाड़ी संभव हो?


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काका कहते हैं "तो सब्जी काहे नहीं उगा लेता फिर...


रामू को काका का आइडिया अच्छा लगता हैं और फिर क्या! रामू वहां सब्जी उगाने में लग जाता है।


वो घास फूंस हटाकर वहां अलग अलग किस्म की सब्जियां लगा देता है।


कुछ टाइम बाद उसकी सब्जियों की पौध अच्छी खासी तैयार हो जाती है, रामू उन्हें बेचने के लिए सूरतपुर गांव जाता था। 


वहां उसे उसकी सब्जी के अच्छे दाम मिलने लगे थे। धीरे धीरे रामू अब धन्ना सेठ के यहां मिलने वाले वेतन से भी कहीं ज्यादा कमाने लगा था।


कुछ सालों बाद…


रामू का अब ये एक बड़ा व्यापार बन गया था। रामू ने बड़ा ज़मीन का टुकड़ा जो खरीद लिया था। अब तो रामू सूरतपुर में ही रहने लगा था।


सीख
(Moral Of The Story)


रामू ने तो निराशा में भी आशा की किरण देख ली। क्या आप भी रामू की तरह जीवन में निराशा रूपी अंधेरे को मिटाने के लिए तैयार है? अगर हां तो आइए और एक कदम आगे बढ़कर आशा के बीज बोने शुरू करते हैं क्योंकि ये ही सबसे बड़ा सफ़लता का मार्ग भी हैं।




लक्ष्य नाम की चिड़ियां
(Motivational Story In Hindi)


एक बार सोनू ने एक बड़े रईस आदमी को देखा और उसके ठाट बाट को देखकर उसने उसके जैसा अमीर बनने की ठान ली।


फिर क्या सोनू जी जान से अमीर बनने के लिए मेहनत करने में जुट गया और वो एक छोटा कपड़ों का व्यापार करने लगा और उसने कपड़ों के काम से काफी पैसा जोड़ भी लिया।


लेकिन, जब सोनू अपनी कपड़ो की फैक्ट्री में जाता तब वहां पर एक बहुत ही विद्वान बंदा कपड़ें खरीदने आया और उसके ज्ञान को देखकर सोनू मानो दंग रह गया।


सोनू ने अब उस विद्वान के जैसा बनने का निश्चय किया। सारा काम धाम छोड़कर सोनू दिन रात पढ़ाई करने लगा।


अभी सोनू को पढ़ाई करते हुए बस दो तीन महीने ही हुए थे। इतने में उसने कुछ ज्यादा थोड़ी सीखा था वो तो बस अभी अक्षर ज्ञान ही सीख पाया था। इतने में उसकी मुलाकात एक गायक से हो जाती है।


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सोनू उस गायक की आवाज़ सुनकर मंत्रमुग्ध हो जाता है, और उसने अब पढ़ाई बंद कर दी और संगीत सीखना शुरू कर दिया।


इसी तरह सोनू की दिन पर दिन उम्र बढ़ती गई और सोनू न तो अमीर बन सका, न विद्वान बन सका और न ही वो अच्छा गायक बन सका।


इस बात से सोनू को बड़ा दुख हुआ। सोनू अब काफी चिंतित रहने लगा था।


एक बार सोनू जब अपने घर जा रहा था तो उसकी मुलाकात एक महात्मा से हुई।


और, महात्मा को सोनू ने अपनी सारी बातें बता दी।


महात्मा ने सोनू के सिर पर हाथ रखा और फिर थोड़ा मुस्कुराएं।


और फिर बोले बेटा! ये दुनिया बड़ी चिकनी हैं, तुम्हारे आस पास बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो तुम्हें अपनी तरफ खींचती हैं। तुम्हें इन फालतू के झमेलों से खुद को दूर रखना होगा और केवल एक निश्चय करके आगे बढ़ना होगा। फिर तुम्हें जरूर सफलता मिलेगी। नहीं तो, इस दुनिया की चकाचौंध में पड़कर कुछ नहीं कर पाओगे और चक्कर ही चक्कर खाते जाओगे। 


समझे सोनू इसे ही लक्ष्य नाम की चिड़ियां कहा जाता है।


सीख
(Moral Of The Story)


बार बार रुचि बदलने से कुछ हासिल नहीं होता, लक्ष्य केवल एक रखो और उसे पाने के लिए जी जान से जुट जाओ। जब ही लक्ष्य नाम की चिड़ियां से मिलन हो पाएगा।


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दूसरों पर निर्भर क्यों रहना

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