फांसी की सजा | Moral Story In Hindi

 फांसी की सजा
(Motivational story in Hindi)


एक समय की बात है फ़्रांस का एक सम्राट था  जिसकी विशाल सेना और वजीर था एक दिन किसी बात पर सम्राट अपने वजीर से नाराज हो गये।



नाराजगी में सम्राट ने वजीर को फांसी की सजा सुना दी जब वजीर को फांसी की सजा सुनाई जा रही थी उस वक़्त वजीर महल में मौजूद नहीं था तो सम्राट ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि "जाओ जाकर वजीर को बता दो कि आज शाम 6 बजे उसे फांसी पर लटका दिया जाएगा।"


सम्राट का आदेश सुनते ही सैनिकों की एक टुकड़ी वजीर के घर की तरफ रवाना हुई वजीर के घर पहुंचते ही सेना ने वजीर के घर को चारों तरफ से घेर लिया और कुछ सैनिक घर के अंदर चले गए अंदर जाते ही सैनिकों ने देखा कि वजीर के घर में तो खुशी का माहौल है क्योंकि उस दिन वजीर का जन्मदिन था उसके घर में दोस्तों और रिश्तेदारों की भीड़-भाड़ थी नाच-गाना चल रहा था तरह-तरह के पकवानों की खुशबू आ रही थी कुल मिलाकर जोरों-सोरों से जन्मदिन की खुशी मनाई जा रही थी।


सैनिकों ने सब के सामने ऐलान कर दिया कि वजीर को आज शाम 6 बजे फांसी दी जायेगी यह ऐलान सुनकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया और फ़ौरन ही नाच-गाना बंद कर दिया गया। सब रिश्तेदार, दोस्त और परिवारजन के बीच उदासी का माहौल हो गया। 


तभी सबको उदास देख वजीर ऊंचे स्वर में बोलता है कि "हे ऊपर वाले तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया जो तुमने  मुझे 6 बजे तक का वक़्त दिया जब तक हम सब जश्न मना सकते हैं।"


वजीर की बात सुनते ही सभी लोग हैरानी में पड़ गए और बोलते हैं कि "ये कैसी बात कर रहे हो? तुम्हें आज 6 बजे फांसी देने का ऐलान किया गया है और तुम जश्न मनाने की बात कर रहे हो।"


फिर वजीर ने किसी तरह सब लोगों को समझाया और जश्न फिर से शुरू करवाया। दोस्त और परिवारजन सब नाराज थे मगर वजीर की खुशी के लिए सब लोग फिर से जश्न में शामिल हो जाते हैं।


ये सब देख कर सैनिक भी दंग थे फिर सैनिक महल जाकर सम्राट को आप-बीती बताते हैं। सम्राट ने सोचा कि मैं भी तो जाकर देखूं। आखिर ये मांजरा क्या है?


सम्राट सेना को लेकर वजीर के घर की तरफ निकलता है जब सम्राट वजीर के घर पहुँचता है तो वह देखता है कि वहाँ तो जश्न मनाया जा रहा है सम्राट ये सब देख दंग रह जाता है और वजीर से कहता है कि "तुम पागल हो गए हो क्या? क्या तुम्हें पता नहीं आज शाम 6 बजे तुम्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा और तुम यहाँ जश्न मना रहे हो।"


वजीर सम्राट से बड़े ही अदब से बोलता है कि " हुजूर। आपका लाख-लाख शुक्रिया कि आपने फांसी का समय शाम 6 बजे का मुकर्रर किया जिससे मुझे शाम 6 बजे तक का वक़्त मिला यदि आप मुझे शाम तक वक़्त ना देतें तो मैं अपने परिवार और दोस्तों के साथ जश्न नहीं मना पाता।


फांसी पर लटकने से पहले मेरे पास 6 बजे तक का समय है तो क्यों मैं इस कीमती समय को व्यर्थ करूँ। मेरे पास जितना भी वक़्त बाकी है, मैं इस समय को खुशी-खुशी गुजारना चाहता हूँ।"


ये बात सुनकर सम्राट खुश हुआ और वजीर को गले से लगा लिया और बोला "जिस इंसान को वक़्त की इतनी कदर है जो जिंदगी का हर लम्हा खुशी खुशी जीना चाहता है उस इंसान को फांसी कैसे दी जा सकती है। उस इंसान को अपनी ज़िन्दगी जीने का पूरा-पूरा हक़ है। सम्राट बोलता है कि तुम्हारी बाते सुनकर हमारा दिल ख़ुश हुआ तुम्हारी फांसी की सजा माफ़ की जाती है।"


कहानी से सीख

(moral of the story )

दोस्तों! हमें इस कहानी से ये सीख मिलती है कि हमें ज़िन्दगी में हमेशा ख़ुश रहना चाहिए फिर चाहे कैसे भी हालात हो … हो सकता है कि आपके जीवन में जो परेशानी है वो बड़ी हो लेकिन कोई भी परेशानी हमारी हिम्मत से बड़ी नहीं हो सकती… कोई भी परेशानी ज्यादा समय तक नहीं रहती क्योंकि "बदलाव" तो प्रकृति का नियम है हमारे पास जितना भी वक़्त बचा है, उसे हमें खुशी-खुशी जीना चाहिए ।


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