आशा ही जीवन है

दोस्तो नमस्कार मैं आपका दोस्त अंकुर, आज मैं आपको अपने से जुड़ी एक छोटी सी बात सांझा करना चाहूंगा।
ये बात उन दिनो की हैं जब मैं कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र था और मैने उस दिन सर्वप्रथम किसी वाद विवाद प्रतिस्पर्धा में भाग लिया था वो भी मेरे दोस्त के कहने पर। मैं बहुत ही चिंता में था मै कैसे क्या बोलूंगा सेमिनार हाल में। प्रतिस्पर्धा का विषय छात्र राजनीति था मुझे उसके पक्ष में बोलना था। जब मेरी बारी आयी ना तो में बहुत काप रहा था,मेरे पसीने छूट रहे थे।जैसे तैसे मैं मंच पर गया। मैं अपना बोलने के लिए लिख कर लाया था, परन्तु जब मैने बोलना शुरू करा तो देखकर भी ढंग से नहीं बोल पाया। मेरको उस समय सबसे अच्छी बात यह लगी कि सारे सेमिनार में  बैठे लोग मेरा हौसला बढ़ा रहे थे  फिर क्या मै आखिर प्रथम आया और मुझे 500 रुपए का ईनाम मिला। मैं खुशी से उछलता हुआ खुशी खुशी घर गया।
तो देखा दोस्तो मैने कैसे अपनी उम्मीद को अपना हौसला बनाया। आप जीवन में कभी हौसला,आशा मत हारिए ये आपका जीवन सवार देगी ये मेरा आपसे वादा है।

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