कहां से आया जूता | Moral Story In Hindi

जूता एक आवश्यक और रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल करने वाली इस चीज को किस तरह सबके समक्ष लाया गया इस कहानी में आपको यह भी बताया जाएगा Moral Story in Hindi के इस कहानी के जरिए आप बहुत कुछ सीखने वाले हैं हमें अपने इस कहानी के प्रति विचार जरूर बताएं। 




कहां से आया जूता

(Moral Story In Hindi)


एक समय की बात है भारत में एक प्रसिद्ध राजा हुआ करता था जिसका एक बहुत बड़ा साम्राज्य था। वह अपने साम्राज्य की प्रजा से बहुत खुश था और उनकी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए हमेशा तत्पर रहता था।


उसकी प्रजा किस प्रकार अपना जीवन यापन कर रही है यह देखने के लिए वह रोजाना अपने महल से गांव में जाया करता था। 


ऐसी ही एक सुनहरे दिन की बात है जब वह राजा अपने महल से निकलकर अपनी प्रजा का हाल-चाल देखने के लिए उनके कस्बे और गांव की ओर निकला।


जिस मार्ग से राजा जा रहा था उस मार्ग पर निर्माण का कुछ कार्य चल रहा था जिस वजह से उस पर विभिन्न प्रकार के गिट्टी और पत्थर गिरे हुए थे। 


जब राजा उस मार्ग पर आगे बढ़ा तो उसके पांव में कुछ गिट्टी और पत्थर चुभ गए।


वह अपने महल वापस आया और अपने सभी मंत्री गण के सामने यह समस्या रखी कि रास्ते बहुत खराब हो गए है। उन पर चलने से पैरों में तकलीफ होती है और हमारी प्रजा को भी इस प्रकार की समस्या से जूझना पड़ता होगा।


इस वजह से सभी परिजनों को इस राजा ने आदेश दिया कि हमारे राज्य में जितने भी मार्ग है उन पर चमड़ा बिछा दिया जाए। 


इस आदेश को सुनने के बाद का जाकर सभी लोग डर गए।


सभी को पता था कि राज्य के इस मार्ग में चमड़ा बिछाने की इस प्रक्रिया से राज्य का सारा पैसा कम पड़ जाएगा।


पर किसी ने भी राजा की आज्ञा का विरोध करने के बारे में नहीं सोचा। सभी को डर लगने लगा कि अगर हम राजा की बात का विरोध करेंगे तो वो हमे सजा देगा।


इस वजह से किसी ने कुछ नही कहा पर हर कोई परेशान था। 


बाद में दरबार का एक समझदार मंत्री राजा के पास आया और कहा कि अगर उसे आज्ञा दी जाए तो वह एक अच्छा उपाय देना चाहता है और उसके उपाय से इतना पैसा खर्चा नहीं होगा जिससे राजा को फायदा होगा।


इस बात से प्रभावित होकर राजा ने उससे उसका उपाय पूछा और उस मंत्री ने कहा कि अगर – "महाराज हम मार्ग पर चमड़ा बिछाने के जगह पर पैर को चमड़े से डक लें तो चोट से काफी आराम हो जाएगा।"


राजा को यह सुझाव अच्छा लगा और उसने अपने मंत्री से कहा कि एक पैर को अच्छे से चमड़ा से ढक दिया जाए और सभी लोगो के पास जूता आया। 


सीख
(Moral Of The Story)


कभी कभी समस्या तो छोटी सी होती है और हम परेशान बहुत ज्यादा होने लगते हैं और उस छोटी सी समस्या के लिए बेफिजूल बड़े बड़े कदम उठा लेते हैं और बाद में एहसास होता है कि अरे! ये समस्या तो ऐसे भी हल हो सकती थी इसलिए दोस्तों समस्या चाहे जैसी भी क्यों न हो, हमें हमेशा अपने विवेक यानी दिमाग से काम लेना चाहिए।

निष्कर्ष


उमीद करते है आप इस लेख से बहुत कुछ सीखें होंगे। आपने समस्या का हल गुस्से में न ले कर सही तरीके से सबकी भलाई होने वाला हल ढूंढ़ने की सीख इस लेख से जानी होगी। अगर आपको इस लेख से लाभ हुआ है तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें और अपने विचार हमे कमेंट करके बताना न भूलें। 


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