Ramanujan Biography in Hindi | गणित के जादूगर : श्रीनिवास रामानुजन

श्रीनिवास रामानुजन का जीवन परिचय
(Ramanuja Biography in Hindi)


आज हम जब भी अपने गणित के किताब खोलते हैं तो उसका पहला अक्षर हमें रामानुजन के जीवन को याद दिलाता है इस लेख में हम भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती को ध्यान में रखते हुए आपके समक्ष Ramanujan Biography in Hindi लेकर आए हैं। 




जहां आम आदमी अपने क्लास के सवालों को अच्छे से सॉल्व करने में थोड़ी सी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं रामानुजन एक ऐसे व्यक्ति थे जो अपने से ऊपर क्लास के मैथ के सवालों को बहुत ही आसानी से सॉल्व कर देते थे।


उनका कहना था कि उनके सपने में एक देवी आती है और उनको मैथ के सारे फार्मूले बता देती है। जिससे वह किसी भी मैथ को बेहद आसानी से सॉल्व कर देते है। अगर आप रामानुजन के बारे में पूरी जानकारी अच्छे से प्राप्त करना चाहते है तो आप इस वक्त बिलकुल सही जगह पर है। 


चलिए आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम जानते है रामानुजन के बारे में कि आखिर कौन थे ये महान गणितज्ञ और कैसा रहा इनका गणित का सफर जिसने इसे पूरी दुनिया में अमर बना दिया। 


रामानुजन बायोग्राफी 

(Ramanujan Biography In Hindi)


रामानुजन का पूरा नाम श्रीनिवास रामानुजन अयंगर था इनका जन्म भारत में कयंबतुर नाम के एक गांव में ब्रम्भन परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें गणित में काफी रुचि थी और इसके वजह से उन्होंने मात्र 11 वर्ष की आयु में S.L Loney की ट्रिग्नोमेट्री की किताब को पूरी तरह से याद कर लिया था।  



आगे चलकर इनके गणित की रुचि को देखते हुए इन्हें गणित पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की गई और धीरे-धीरे उन्होंने गणित में बहुत सारी खोज की। उनकी सभी खोजो में सबसे ज्यादा लोकप्रिय पाई या infinite series of pi हैं। उनके कुछ सर्वप्रिय काम के कुछ नाम – 


  • Landau- Ramanujan constant.

  • Mock Theta Functions.

  • Ramanujan Conjecture.

  • Ramanujan Prime.

  • More than 3900 identities.

  • Number Theory.

  • Ramanujan- Soldner Constant.

  • Ramanujan- Theta Function.


रामानुजन की प्रतिभा ने उन्हें पूरे विश्व में प्रचलित बना दिया और उन्होंने केवल स्वयं के लिए नहीं अपितु भारत के लिए भी कई सारे गौरव प्राप्त किए। इनके बारे में अधिक बाते हम Ramanuja Biography in Hindi के इस लेख में आगे करेंगे। 


नाम

श्रीनिवास रामानुजन 

पिता का नाम

श्रीनिवास अय्यंगर

माता का नाम

कोमलताम्मल

जन्म स्थान

तमिलनाडु

शिक्षा

कैंब्रिज विश्वविद्यालय

जन्मदिन 

22 दिसंबर 1987


रामानुजन की प्रारंभिक जीवन 

(Ramanujan Education)


22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु राज्य में एक ऐसे लड़के का जन्म हुआ जिसने आगे चलकर इतने सारे गणित के फार्मूले दिए कि पूरी दुनिया उनकी लोहा मान गई। उस शख्स का नाम श्रीनिवास‌ रामानुजन है।



इनकी एक खास बात यह थी कि अगर यह कोई गणित के सवाल में उलझ जाते थे या फिर इनसे कोई गणित का सवाल हल नहीं होता था तो यह खाना-पीना तक भूल जाते थे और उसी गणित के सवाल में लगे रहते थे जब तक कि वह सवाल इनसे पूरे अच्छे से बन न जाए।


उन्होंने कई तरह के नए-नए प्रमेय की रचना की और उन्होंने गणित के सूत्र की निर्माण की। उनकी जीवन की एक खास कड़ी यह भी थी कि अगर कोई सवाल उनसे नहीं बनता था और वह जब रात में सोते थे तो उनके सपने में नमागिरी देवी आती थी और उनको उस गणित के सवाल का जवाब बताकर जाती थी। 


रामानुजन का कहना था कि वह इसी वजह से मैथ के सारे सवालों के जवाब आसानी से दे पाते हैं क्योंकि उनके कुल की देवी जिस देवी को उनका परिवार पिछले कई सालों से अपनी कुलदेवी मानते आया है।


वह उनके सपने में आती हैं और जिस गणित के सवाल में रामानुजन फंसे रहते हैं उस गरीब के सवाल का जवाब उनको बता देती हैं।


हम आपको बता दें कि शुरुआत में रामानुजन के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी।रामानुजम के पिता एक छोटे से कपड़े की दुकान में काम करते थे और उनकी माता जो कि भगवान को मानती थी वह मंदिर में कीर्तन भजन करती थी।


रामानुजन की माता मंदिर में कीर्तन भजन करती थी और जब उन्हें मंदिर से प्रसाद मिलता था तो उससे उनके एक समय का खाना हो जाता था और दूसरे समय के खाने के लिए रामानुजन का परिवार पूरी तरह से उनके पिता के ऊपर निर्भर था। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि रामानुजन के घर वालों को सिर्फ एक वक्त का खाना खाकर रहना पड़ता था। 


कम उम्र में ही रामानुजन ऊंचे क्लास के मैथ के क्वेश्चन को सॉल्व करने लगे थे 

(Small Age Math's Master)


हम आपको बता दें कि रामानुजन छोटी उम्र में ही अपने गणित के टैलेंट को दिखाना शुरू कर दिए थे। वह जब छोटे थे तो वह बड़े बड़े क्लासों के मैथ के सवालों के जवाब भी आसानी से दे देते थे। हालांकि उनके परिवार की स्थिति इतनी दयनीय थी कि वह कॉपी तक नहीं खरीद सकते थे। इसलिए वह ‍स्लेट पर पढ़ाई किया करते थे और बार-बार मैथ बनाकर उसे मिटाते और फिर उसे स्लेट पर मैथ बनाते। ‍स्लेट पर मैथ बना बना कर और सीधे उसके बाद वह अपने परीक्षा में उत्तर कॉपी पर बनाते। 



जब उनकी नई कक्षा की शुरुआत होती थी और उन्हें जब मैथ की किताब मिलती थी तो वह अपने मैथ के किताब के सारे क्वेश्चन मात्र एक से डेढ़ महीने में सॉल्व कर लेते थे।


उसके बाद वह अपने से ऊंची क्लास के गणित के किताब को बनाना शुरु कर देते थे। कई बार तो ऐसा होता था कि वह अपने से ऊंची क्लास के बच्चों को गणित के सवाल को बनाने में मदद करते थे और उन्हें बताते थे।


यह देखकर लोग अचंभित रह जाते थे कि एक छोटा बच्चा कैसे इतने बड़े-बड़े क्लास के सवालों के जवाब दे दे रहा है। इससे रामानुजन को भी फायदा होता उन्हें ज्यादा पढ़ने का मौका भी मिल जाता और लोग उनकी तारीफ भी करते। 


मैथ में मिलते पूरे नंबर और बाकी विषय में हो जाते फेल 

(Ramanujan Math's Master)


जब रामानुजन के सभी शिक्षकों ने देखा कि रामानुजन गणित के विषय में इतनी तेज है और बाकी सारे विषय में वह काफी कमजोर है तो उनके एक अंग्रेजी शिक्षक ने उन पर टिप्पणी करते हुए यह बात बोला कि अगर मुझे गणित के विषय में रामानुजन को 101 या फिर हजार नंबर देने की छूट हो तो मैं रामानुजम को दूंगा।


लेकिन बाकी विषय में रामानुजन जीरो है उसे बाकी विषय में भी ध्यान देना होगा। हम आपको बता दें कि 11वीं क्लास में रामानुजम मैथ में पूरे में पूरे नंबर लाए थे लेकिन बाकी सारे विषय में फेल हो गए थे इसलिए उन्हें उनकी पढ़ाई के लिए मिली स्कॉलरशिप भी गंवानी पड़ी थी। 


जब वह 11वीं क्लास में बाकी सारे विषयों में फेल हो गए तो इस तनाव से उन्होंने एक बार खुदकुशी करने की भी कोशिश की लेकिन भाग्य से वह बच गए।


आखिरी कोशिश (motivational story in hindi)


बचने के बाद लोगों ने उन्हें मैथ के साथ-साथ और भी सारे विषय पर ध्यान देने के लिए कहा और लोगों ने खूब मेहनत करके उन्हें जैसे तैसे 12वीं में सारे सब्जेक्ट में पास करवाया।


उनकी घर की स्थिति खराब होने की वजह से उन्हें 12वीं पास करने के बाद एक क्लर्क का काम करना पड़ा। हालांकि रामानुजन की एक ही मंजिल था कि वह सिर्फ मैथ पढ़े और साथ में लोगों को मैथ ही पढ़ाएं। 


रामानुजन की इंग्लैंड में शुरू हुई नई जिंदगी 

(Ramanujan In England)


रामानुजन ने क्लर्क की नौकरी थोड़े दिन करने के बाद छोड़ दी और इंग्लैंड चले गए।


इंग्लैंड में उन्हें गणित के सवाल के जवाब देने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी और वहां पर वे बिल्कुल फ्री थे और लगातार गणित बना रहे थे।


वहां की लाइब्रेरी में से बुक ले लेकर रामानुजन मैथ के सवालों को बनाते और उसी दौरान रामानुजन ने कई तरह के मैथ के फार्मूले की खोज की।


इंग्लैंड में ही उन्हें साइंस में बैचलर की डिग्री मिली। इसके साथ उन्हें इंग्लैंड की रॉयल सोसाइटी की मेंबरशिप भी मिली।


जो उस वक्त किसी भारतीय के लिए बहुत ही सौभाग्य की बात थी क्योंकि भारतीय लोगों को वहां पर रॉयल सोसाइटी की मेंबरशिप नहीं मिल पाती थी। लेकिन रामानुजन को किसी की नजर लग गई। 


वह तमिलनाडु में रहने वाले थे और उन्हें गर्मी अच्छी लगती थी लेकिन इंग्लैंड में मौसम ठंडा होने के कारण उन्हें वहां ठहरने में काफी दिक्कत होती थी


और, वह पढ़ाई की वजह से ज्यादातर अपने सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते थे। जिसके कारण लगातार उनकी सेहत खराब होती गई और अंत में उनकी सेहत इतनी खराब हो गई कि उन्हें मजबूरन इंडिया वापस आना पड़ा।


इंडिया वापस आने के कुछ दिन बाद ही यानी कि 26 अप्रैल 1920 को इस दुनिया को छोड़ कर चल बसे। उस वक्त उनकी उम्र 32 साल की थी। 32 साल के इस कम उम्र में ही वह इस दुनिया को छोड़कर चल बसे लेकिन उन्होंने इस दुनिया को मैथ के कई सारे फार्मूले दिए और कई तरह की प्रमेय की खोज की। 


निष्कर्ष 

(Conclusion)


उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा और इसमें दी गई सारी जानकारी आपको बेहद अच्छे से समझ में आ गई होगी। हम आपको एक बार फिर याद दिला दें कि आज की इस आर्टिकल के माध्यम से हमने अपने देश के एक महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के बारे में जाना। 


तो अगर आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा और Ramanujan Biography in Hindi के बारे में दी गई जानकारी आपको पसंद आई तो इसे अपने सोशल मीडिया नेटवर्क पर जरूर शेयर करें। 




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