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दूसरों पर क्यों निर्भर रहना

आज की हम अपनी इस पोस्ट में लाए है ऐसी बेहतरीन प्रेरणादाई कहानी (short motivational story) जो आपको काफी कुछ अच्छा पॉजिटिव सीखने में मदद करेगी।



दूसरो पर निर्भर क्यों रहना
(Success Story In Hindi)


ढोलपुर गांव में सुधीर नाम का एक लड़का रहता था, वो बहुत आलसी था। कुछ काम धाम भी नहीं करता था। इधर उधर से कोई न कोई रास्ते में उसको खाने के लिए कुछ दे देता था। ऐसे ही रोज उसका जीवन गुजरा करता था। 


एक बार सुधीर टहलते टहलते जंगल में निकल गया और वहां घूमने लगा। उसने जंगल में देखा कि एक लोमड़ी की टांग टूटी हुई है और वो बड़ी ही मुश्किल से चल पा रही है।


अब सुधीर ये सोचने लगा कि ये लोमड़ी शिकार कैसे करती होगी और अपने लिए खाना कैसे जुटाती होगी इसलिए, सुधीर उस लोमड़ी का पीछा करने लगता है।


सुधीर कुछ देर चला ही होता है कि उसे शेर के दहाड़ने की आवाज़ सुनाई देती है और वो पेड़ के ऊपर चढ़कर छुप जाता है। 


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सुधीर देखता है कि शेर के मुंह में एक मांस का टुकड़ा है और उसमें से एक छोटा टुकड़ा नीचे गिर गया है।


और, वो ही टुकड़ा लोमड़ी खा लेती है। सुधीर सोचता है, भगवान आप कितने दयालु और कृपालु है। आप लोमड़ी के खाने की व्यवस्था भी कर देते हो, फिर तो आप मेरे लिए भी खाने की व्यवस्था कर ही दोगे।


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ऐसा सोचकर सुधीर अपने घर आ जाता है और इसी सोच में कि भगवान मेरे लिए भी खाने की व्यवस्था कर ही देंगे, 4 दिन तक भूखा प्यासा बैठा रहता है, जिसके कारण सुधीर काफी कमजोर हो जाता है।


सुधीर के घर के पास से ही एक साधु महात्मा गुजर रहे होते है, सुधीर उन्हें रोककर अपनी सारी आपबीती बताता है। साधु महात्मा कहते हैं तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनना है, तुम्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना है।


आलसी सुमित साधु की सारी बातें समझ जाता है, और फिर सुधीर काम की तलाश में बाहर निकल पड़ता है और फिर वो एक कर्मठ और मेहनती इंसान बनता है।



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