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समस्या ही समस्या है

 समस्या ही समस्या है

(Short Moral Story In Hindi)


बहुत पुराने समय की बात है जब महा ज्ञानी पंडित ज्ञानेश्वर हिमालय की घनघोर पहाड़ियों में रहा करते थे, तब उन्होंने भक्ति भाव से अपना बचा हुआ जीवन ईश्वर की अराधना में लगाने का निश्चय किया।


अब पंडित ज्ञानेश्वर लोगों के बीच रहकर काफी थक चुके थे इसलिए उन्होंने ये निर्णय लिया था।


लेकिन, पंडित ज्ञानेश्वर के भक्त उनका पीछा इतनी आसानी से कहां छोड़ने वाले थे। पंडित ज्ञानेश्वर की प्रसिद्धि इतनी थी कि हिमालय की घनघोर पहाड़ियों में भी लोग बाग दुर्गम पहाड़ियों, नदियों और झरनों को पार करके उनके पास पहुंच गए थे।


धीरे धीरे पंडित ज्ञानेश्वर की कुटिया के बाहर लोगों का ताता लग गया था। हर कोई अपनी अपनी समस्या के समाधान के लिए दूर दूर से पंडित ज्ञानेश्वर के पास आया था।


क्योंकि काफी लोग पंडित ज्ञानेश्वर की कुटिया के बाहर इक्कठा हो गए थे इसलिए उन सभी भक्तो को प्रतीक्षा करने के लिए कहा।


लोगों को प्रतीक्षा करते करते पूरे 5 दिन बीत गए थे। हर कोई अपनी अपनी समस्या का समाधान पाने के लिए बैचेन हो रहा था।


ऊपर से पांच दिन बीतने के कारण अब लोग दोगुने इक्कठा हो गए थे।


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पंडित ज्ञानेश्वर अपनी कुटिया से बाहर निकलकर आते हैं और लोगों से कहते हैं "मैं आपके हरेक सवाल का जवाब दूंगा, लेकिन इससे पहले आप सभी को मुझसे एक वादा करना होगा कि आप यहां से जाने के बाद इस जगह के बारे में और किसी को नहीं बताएंगे। ताकि मैं यहां रहकर अपनी एकांत साधना कर पाऊं।"


चलिए अब आप अपनी अपनी समस्याएं बताइए -


इतना सुनते ही किसी ने अपनी समस्या बतानी शुरु कर दी, अभी उस व्यक्ति ने अपनी समस्या बतानी शुरु ही की थी कि किसी दूसरे ने अपनी बात शुरू कर दी। 


क्योंकि, सभी जानते थे कि ये गुरु जी से उनकी आखरी भेंट हैं। इसके बाद उनसे कभी मिलना नहीं होगा इसलिए हर कोई जल्द से जल्द अपनी अपनी बात रखना चाहता था।


कुछ ही देर हुई थी कि वहां का माहौल मछ्ली बाज़ार जैसा बन गया। तब पंडित ज्ञानेश्वर को ऊंची आवाज में बोलकर सबको शांत करवाना पड़ा। 


गुरु जी ने लोगों से अपनी अपनी समस्या एक कागज पर लिखकर उन्हें देने के लिए कहा।


सभी लोगों ने अपनी अपनी समस्या कागज पर लिखकर गुरू जी को पकड़ा दी।


गुरू जी ने सभी की पर्चियों को एक टोकरी में डालकर मिला दिया।


और फिर, गुरु जी ने उस टोकरी को लोगों के सामने किया और कहा "इस टोकरी को एक दूसरे को पास करो, हर व्यक्ति एक पर्ची उठाएगा और इसे पढ़ेगा। ये करने के बाद उसको ये फैसला लेना होगा कि क्या वो अपनी समस्या को इस पर्ची में लिखी समस्या से बदलना चाहता है।"



अब हर कोई टोकरी में रखी पर्ची उठाता, उसे पढ़ता और सहम सा जाता। एक एक कर सभी लोगों ने पर्चियां देख ली और कोई भी अपनी समस्या के बदले दूसरे की समस्या को लेने के लिए तैयार नहीं हुआ।


सब ये ही सोचे रहे थे कि उनकी अपनी समस्या चाहे कितनी ही बड़ी कठिन क्यों न हो लेकिन, बाकी लोगों जितनी कठिन नहीं है।


एक से दो घंटे में सभी लोग अपनी अपनी पर्ची लिए वहां से घर लौटने लगे। वे सभी खुश थे क्योंकि उन्हें अब इस बात का एहसास हो गया था कि उनकी समस्याएं उतनी भी बड़ी नहीं हैं जितनी कि वो सोचते हैं।


सीख

(Moral Of The Story)


समस्याएं तो हम सभी के जीवन में हैं। कोई किसी चीज़ से तो कोई किसी चीज से परेशान हैं। कोई हेल्थ से परेशान हैं, कोई कैरियर से परेशान हैं, तो कोई अच्छी जॉब नहीं मिल पाने से परेशान हैं… हमें उनसे दुखी होने से अच्छा है कि हम उनके sollution पर ध्यान लगाएं। 


इस दुनिया में लोगों की इतनी बड़ी बड़ी problems हैं कि हमारी problems तो उनके आगे कुछ भी नहीं है। हमें जो कुछ भी ईश्वर ने दिया हैं, हमें उसके लिए सदैव thankful रहना चाहिए और जीवन को happy बनाने का प्रयास करना चाहिए।


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