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कारीगर की कहानी


 कारीगर की कहानी
(Short Moral Story In Hindi)


सेठ धनपतराय के यहां एक कारीगर काम करता था। 


कारीगर ने सेठ धनपतराय के यहां पूरे 25 साल तक काम किया था, अब कारीगर काफी बूढ़ा हो गया था।


कारीगर ने एक दिन सेठ धनपतराय से अपने काम से रिटायर होने की बात कह दी।


सेठ ने कारीगर को कहा अब तुम रिटायर होने ही जा रहे हो तो जाते जाते एक मकान और बना दो।


कारीगर ने मन मारकर सेठ धनपतराय को मकान बनाने के लिए हां कर दी।


कारीगर मकान तो बनाने लग गया था परंतु वो पूरे मन से मकान को नहीं बना रहा था। 


वो सोच रहा था कि मैंने सेठ के यहां इतने सालों तक काम किया और उसके बावजूद भी सेठ मुझे जाते जाते कुछ देने से तो दूर, उल्टा काम करवा रहा है।


कारीगर ने जैसे तैसे मकान बनाने का काम पूरा कर लिया था लेकिन वो अपनी सोच के कारण मकान उतना अच्छा नहीं बना पाया था जितना वो पहले बनाया करता था।


काम खत्म करने के बाद कारीगर सेठ के पास जाता है तो सेठ उससे कहता हैं कि "तुमने पूरी ज़िंदगी मेरे यहां मकान बनाने में बिता दी और इस बीच तुमने बहुत सुंदर सुंदर मकान बनाएं। इसलिए मैं आज तुम्हें कुछ देना चाहता हूं। 


तुमसे जो मैंने अभी अभी मकान बनवाया है, मैं वो तुम्हें गिफ्ट के रूप में देना चाहता हूं। सेठ धनपतराय इतना कहकर उसे मकान की चाबी दे देता हैं।"


कारीगर अपना सिर पकड़कर बैठ जाता है और मन ही मन पछताने लगता है कि मैंने अपना ही घर सही से नहीं बनाया।


सीख

(Moral Of The Story)


हमें अपना हर काम ईमानदारी से करना चाहिए। फल की चिंता किए बिना हमें अपने काम में खुद का 100 फीसदी झोंक देना चाहिए। क्योंकि ईमानदारी से किए गए हर काम का फल भी बाद में अच्छा ही मिलता है। 


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