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5 बेहतरीन रोचक कहानियां | 5 best moral stories in hindi

हम मोटिवेशनल कहानियां क्यों पढ़ते हैं? 

इन कहानियों को पढ़कर हमें दूसरों की गलतियों का पता चलता है और बहुमूल्य सीख मिलती है। अगर हम इन motivational story in hindi को पढ़कर अपने जीवन में उतारे तो यकीनन हमारी ज़िंदगी बहुत अच्छी बन जाएगी। 

    आइए पढ़ते हैं ये बेहतरीन रोचक कहानियां -





    वाणी का असर
    (Motivational Story In Hindi)


    राजा भानूमल को शिकार करना बहुत अच्छा लगता था। राजा भानूमल अपने कुछ सैनिको और सरदार के साथ आज भी शिकार करने जा रहे थे।


    राजा आज शिकार करने में इतने खो गए थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वो जंगल के बहुत भीतर तक आ गए हैं।


    राजा भानूमल को बहुत तेज प्यास लग रही थी लेकिन दूर दूर तक पानी का नामों निशान नज़र नहीं आ रहा था।


    राजा ने अपने सैनिक को पानी लाने का आदेश दिया।


    सैनिक को बड़ी दूर जाने के बाद एक नेत्रहीन वृद्ध आदमी दिखाई दिया जो कि रास्ते में थके लोगों को पानी पिलाकर उनकी प्यास बुझा रहा था।


    सैनिक भी उस नेत्रहीन वृद्ध आदमी के पास गया और बोला "हे! बूढ़े जरा एक लौटा पानी तो दें, मुझे इसे लेकर दूर जाना है।"


    ये सुनकर नेत्रहीन वृद्ध आदमी ने जवाब दिया "मूर्ख यहां से चला जा, मैं ऐसे लोगों को पानी नहीं पिलाता।"


    सैनिक वहां से चला जाता है। सैनिक ये सारी बातें राजा के सरदार को बताता है।


    और, अबकी बार सरदार उसके पास जाता हैं और कहता है "ओ अंधे एक लौटा पानी दे तो।" 


    ये सुनकर नेत्रहीन वृद्ध आदमी सरदार को भी पानी देने से मना कर देता है।


    राजा की प्यास बढ़ती जा रही थी।


    राजा पानी के बारे में सरदार से पूछता है तो सरदार कहता है थोड़ी दूर एक नेत्रहीन वृद्ध आदमी पानी लेकर लोगों की सेवा तो कर रहा है लेकिन वो हमें पानी देने से मना कर रहा है।



    अब, राजा खुद अपने सैनिकों और सरदार के साथ उस नेत्रहीन वृद्ध आदमी के पास जाते हैं और उससे कहते हैं "बाबा, हमें बड़ी तेज प्यास लगी है, प्यास के मारे गला सूखा जा रहा है। यदि आप हमें थोड़ा पानी पिला देंगे तो आपकी बहुत कृपा होगी।"


    ये सुनकर नेत्रहीन वृद्ध आदमी ने कहा "राजन आप बैठिए, मैं आपको अभी पानी पिलाता हूं।"


    नेत्रहीन वृद्ध आदमी ने राजा को बड़े ही आदर सत्कार के साथ पानी पिलाया। 


    राजा ने उस नेत्रहीन वृद्ध आदमी से पूछा कि आपको कैसे पता चला कि मैं राजा हूं और ये सैनिक व सरदार है?


    उस नेत्रहीन वृद्ध आदमी ने बड़ा ही सुंदर जवाब दिया कि "इंसान की पहचान के लिए आंखों की जरुरत नहीं होती, उसकी असली पहचान तो वाणी से ही हो जाती है।"


    ये सुनकर सैनिक और सरदार को अपने ऊपर शर्म महसूस होने लगी।


    सीख

    (Moral Of The Story)


    इस motivational story in hindi से हमें ये सीख मिलती है कि जीवन में वाणी से बढ़कर कुछ भी नहीं है। अगर हमारी वाणी अच्छी होगी और बोलने का तरीका होगा तो हम इस दुनिया में वो हर चीज़ हासिल कर सकते हैं जो हम इस दुनिया में हासिल करना चाहते हैं।



     खुश होने का राज
    (Short Motivational Story In Hindi)


    मुकुंदपुर गांव में नीरज सर के बड़े चर्चे थे। आखिर, नीरज सर पूरे गांव में इकलौते ऐसे सर थे जिनका पढ़ाया हुआ सभी बच्चों को समझ में आता था।


    नीरज सर की पढ़ाई अब स्कूल के बच्चें ही नहीं गांव के बड़े बूढ़े भी करने लग गए थे।


    गांव में कोई भी समस्या तकलीफ होती तो लोग बाग नीरज सर को उसके बारे में जरुर बताते थे। नीरज सर के पास हर समस्या का हल होता था।



    एक बार एक व्यक्ति नीरज सर के पास आया। वो काफ़ी हताश और परेशान हालत में था। उसने नीरज सर से एक प्रश्न पूछा " सर! मैं खुश कैसे रह सकता हूं, मेरी खुशी का क्या राज है? 


    नीरज सर थोड़ा मुस्कुराएं! फिर उस व्यक्ति को अपने साथ लिए पास के एक गांव में चल दिए।


    रास्ते में नीरज सर को एक बड़ा पत्थर दिखाई देता है, नीरज सर उस व्यक्ति से उस पत्थर को उठाने के लिए कहते हैं।


    नीरज सर के कहने पर वो व्यक्ति उस पत्थर को उठा लेता है। 


    क्योंकि, पत्थर भारी था इसलिए थोड़ी दूर चलने के बाद उसके हाथ में दर्द होने लगता है। लेकिन, वो दर्द को सहन कर लेता है, और चुपचाप फिर से चलने लगता है।


    उस व्यक्ति को अब काफी देर हो चुकी थी। वो बड़ी देर से दर्द को सहन करता जा रहा था, अब उससे दर्द सहन नहीं हो रहा था। 


    आख़िर, वो नीरज सर से कह ही देता है "ये पत्थर बहुत भारी हैं, मुझे इसको उठाने की वजह से काफी दर्द हो रहा है, अब मैं और आगे नहीं जा सकता। मैं काफ़ी थक गया हूं।"


    तब ही नीरज सर उस व्यक्ति से पत्थर को नीचे रखने के लिए कहते हैं।


    जैसे ही वो व्यक्ति पत्थर को नीचे रखता है उसे काफी राहत मिलती है।



    नीरज सर कहते हैं "ये ही तो तुम्हारी खुशी का राज भी है।"


    उस व्यक्ति को कुछ समझ नहीं आता।


    तब नीरज सर कहते हैं "जब तुमने इस पत्थर को 10 मिनट तक उठाया तो तुम्हें थोड़ा दर्द हुआ और जब तुमने इसको 30 मिनट तक उठाए रखा तो तुम्हारा दर्द और ज्यादा बढ़ता ही गया। 


    ठीक इसी प्रकार जब तक तुम अपने दुखों का बोझ लिए ऐसे ही ज़िंदगी जीते रहोगे तो तुम्हें खुशी नहीं मिलेगी। तुम हमेशा निराश ही रहोगे। 


    अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो अपने ऊपर इन दुखों को हावी मत होने दो।"


    ये दुख तो इन पत्थरों की तरह हैं इनको जितना ढोओगे उतना तुम्हारा दर्द और दुख बढ़ता ही जाएगा।


    अब उस व्यक्ति को अब अपने प्रश्न का जवाब मिल गया था, वो नीरज सर को धन्यवाद करके खुशी खुशी अपने गांव लौट जाता है।


    सीख

    (Moral Of The Story)


    हम इस छोटी सी ज़िंदगी में पता नहीं कितने ही बोझ लिए घूम रहे हैं, और अपनी ज़िंदगी में तनाव, चिंता से घिर चुके हैं। ऐसे में हमें इस कहानी से सीख लेनी चाहिए और जीवन में इन बोझों को कम कर खुद को खुश रखने का प्रयास करना चाहिए।



    दो दोस्त
    (Moral Story In Hindi)


    रामू और शामू बहुत अच्छे दोस्त थे। वे दोनों राजस्थान के रेगिस्तान में घूमने गए थे।


    जब वो दोनों रेगिस्तान को पार कर रहे थे तब उनका किसी बात पर झगड़ा हो जाता है और शामू रामू को एक थप्पड़ जड़ देता है।


    रामू को ये बात दिल पर लग जाती है, तब रामू एक लकड़ी के टुकड़े से रेत पर लिख देता है कि "आज मेरे और मेरे दोस्त में एक छोटी सी बात पर लड़ाई हो गई और उसने मुझे थप्पड़ मार दिया।"


    क्योंकी, रेगिस्तान काफी घना था इसलिए दोनों दोस्तों ने आपस में रेगिस्तान पार करने के बाद झगड़े को सुलझाने की बात करी।


    और, चुपचाप एक दूसरे से बात किए बगैर रेगीस्तान पार करने में लग गए।


    जैसे ही वो दोनों रेगिस्तान पार करने ही वाले थे कि रामू दलदल में फंस जाता है।



    शामू रामू को बचाने के लिए अपना पूरा दमखम लगा देता है और उसे बड़ी ही मुश्किल से दलदल से बाहर निकालने में कामयाब हो पाता है।


    अब, रामू पास में पड़े हुए एक बड़े से पत्थर पर लिखता है कि "आज मेरे दोस्त ने मुझे दलदल में धंसने से बचाया।"


    शामू रामू की सारी करतूत नोटिस कर रहा था। 


    शामू ने रामू से पूछा जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा तो तुमने ये बात रेत पर लिखी और जब मैंने तुम्हें दलदल में धंसने से बचाया तो तुमने इस बात को पत्थर पर लिखा। आख़िर तुमने ऐसा क्यों किया?


    तब रामू कहता है "जब हमें कोई कष्ट, दुख या पीड़ा पहुंचाता है तो हमें उसे रेत पर लिखना चाहिए ताकि हवा उसे मिटा दें और; यदि कोई हमारे साथ अच्छा व्यवहार करें तो हमें उसे पत्थर पर लिखना चाहिए ताकि उसे कोई मिटा न सकें"


    सीख

    (Moral Of The Story)


    हमें अपने जीवन में अच्छे व्यवहार और अच्छी बातों का आचरण करना चाहिए ताकि हम एक नेक इंसान बन सकें। अक्सर हम बुरी घटनाओं को दिल पर लगाकर अपना ही सबसे बड़ा नुकसान कर बैठते हैं।



    दिखावे का फल
    (Short Motivational Story In Hindi)


    राजू की MBA की पढ़ाई पूरी होते ही उसकी जॉब एक अच्छी सी कंपनी में लग जाती है। ऑफिस के बॉस उसकी काबिलियत को देखते हुए उसे अलग कैबिन दे देते हैं।


    राजू मानो फूला नहीं समाया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वो इतनी जल्दी सफल हो जाएगा, उसे अपने ऊपर भरोसा ही नहीं हो पा रहा था। राजू काफी excited हो जाता है।


    राजू जब अपने कैबिन में बैठा था, बैठे बैठे वो अपने कैबिन को निहार रहा था। जब ही कैबिन का दरवाज़ा खट खटाने की आवाज उसे सुनाई देती है। 


    दरवाज़े पर एक साधारण सा व्यक्ति आया होता है, राजू उसको अंदर बुलाने के बजाए 2 घंटे बाहर इंतजार करने के लिए कहता है।


    दो घंटे बाद जब वो व्यक्ति अंदर आने के लिए दरवाज़ा खट खटाता है तब राजू टेलीफोन पर बात करने लग जाता है। टेलीफोन पर राजू काफी एशो आराम की बातें करता है और एक से एक बड़ी बड़ी बात फेंकने लगता है।



    वो साधारण व्यक्ति राजू की सारी बातें सुन रहा था। लेकिन राजू तो मानो चुप होने का नाम ही नहीं ले रहा था, वो तो एक से एक डींगे हांक रहा था।


    जब राजू की सारी बातें खत्म हो जाती है तब वो उस साधारण व्यक्ति से पूछता है "बताओं तुम यहां किस काम के लिए आए हो?


    वो साधारण व्यक्ति कहता है "मैं यहां टेलिफोन ठीक करने आया हूं। मुझे खबर मिली थी कि आप जिस टेलिफोन से बात कर रहे थे वो कई हफ्तों से खराब पड़ा है इसलिए मैं इसे रिपेयर करने आया हूं।"


    राजू उस साधारण व्यक्ति की बातें सुनकर शर्म से लाल हो जाता है और चुपचाप बिना बोले कैबिन के बाहर चला जाता है।


    राजू को दिखावे का फल मिल चुका था।


    सीख

    (Moral Of The Story)


    सफलता मिलने पर ज्यादा excited होना और फालतू का दिखावा करने से आप सफल होकर भी असफल हो जाते हैं। ऐसी सफलता का स्वाद क्षणिक होता है। 



    गरीब की चोरी
    (Short Moral Story In Hindi)


    एक बार संत पदमाचारी के गुरुकुल से उनका बड़ा ही कीमती कंबल चोरी हो गया।


    शाम को जब संत गुरुकुल का समान लेने बाजार जा रहे थे तभी उन्होंने उस व्यक्ति को देखा जो कि एक दुकानदार को वो ही कंबल बेच रहा था।


    लेकिन, दुकानदार मानो कंबल खरीदने को तैयार ही नहीं हो रहा था। दुकानदार बार बार उस व्यक्ति को कह रहा था कि यह कंबल तुम्हारा है या चोरी का?


    क्योंकि दुकानदार पहली बार जो इतना कीमती कंबल देख रहा था। दुकानदार ने कहा अगर तुम किसी भले आदमी से इसकी गवाही दिला दो कि वाकई! ये कंबल तुम्हारा है तो मैं इसको जरुर खरीद लूंगा।


    वहीं बगल में खड़े संत पदमाचरी चुपके से सब कुछ सुन रहे थे। संत ने उस व्यक्ति की गवाही दे दी और कहा "ये कंबल इसी का है, आप इसको पैसे दे दो"



    संत के छात्रों ने पूछा कि गुरु जी आपने ऐसा क्यों किया?


    तब संत ने कहा "ये बेचारा बहुत गरीब है और इसने गरीबी के कारण मजबूरी में ही ये चोरी की होगी। हमें हर स्थिति में गरीबों की मदद करनी चाहिए।"


    संत पदमाचारी की बातें सुनकर उस व्यक्ति की आंखें भर आती है और वो उनके पैरों में गिर गया। उस व्यक्ति ने कभी चोरी नहीं करने का वादा किया।


    सीख

    (Moral Of The Story)


    हम अक्सर जीवन में फैसले करने में बहुत जल्दी करते हैं, हमें फैसले करने से पहले परिस्थितियों को भी समझना चाहिए।



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    1 Comments

    1. बहुत ही सुंदर और प्रेरक प्रसंग है आप की कहानियाँ

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