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आलसी भाइयों की कहानी और कोरोना का डर



 हम नियमित रूप से खुदसे मोटीवेट रहने की कोशिश करते हैं और इस कोरोना के टाइम में खुद को मोटीवेट रख पाना बेहद मुश्किल काम होता जा रहा है इसी के मद्देनजर हम आपके लिए प्रेरणादायक कहानियां(motivational story in hindi) लाते रहते हैं जिससे कि आपका मनोबल और उत्साह निरंतर बढ़ता रहे।





    आलसी भाइयों की कहानी
    (Best Inspirational Story)


    चीकू और मीकू दोनों भाई बहुत आलसी थे, दोनों में इतना कूट कूट कर आलकस भरा हुआ था कि वो दोनों हरेक काम को करने से मना कर देते थे। उनकी मम्मी उन दोनों से बहुत परेशान रहती थी।


    वे दोनों आलसी बहुत ही लापरवाह भी थे, मम्मी के काफी समझाने बुझाने के बाद भी वो दोनों अपने मन की ही करते थे।


    एक बार की बात है वो दिनों आम के पेड़ के नीचे खेल रहे थे कि खेलते खेलते अचानक पेड़ के नीचे ही सो गए। उन दोनों ने कसके दो से ढाई घंटे की नींद ली। अब उन्हें भूख लग रही थी।


    आम के पेड़ से आम नीचे गिरता है परंतु वह आम लुढ़कता हुआ थोड़ा सा उन दोनों से आगे जा गिरता है, उन दोनों में इतना आलकस भरा होता है कि उन दोनों में दो कदम उठकर आम को उठाकर खा ले, वो भी उन्हें भारी काम लग रहा था।


    यह सारा नज़ारा वहां खड़ा एक मंत्री देख रहा होता है। वह मंत्री उन दोनों की नौटंकी देखने के बाद वहां से जा रहा होता है कि चीकू उस मंत्री को आवाज़ लगाकर कहता है अरे! ओ भाई जरा ये आम हमें उठाकर पकड़ा देंगे।


    मंत्री कहता है तुम क्यों नहीं उठा लेते भला।


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    आखिरी कोशिश


    मिकू कहता है, अरे कहां हमसे इतनी मेहनत करवाते हो। इतनी मेहनत हमसे कहां होगी। तुम ही ये आम हमें उठाकर दे दो।


    मंत्री वहां से गुस्से में आम को उठाए बिना ही चला जाता है।


    मंत्री सीधा उन दोनों की मम्मी के घर जाता है और सारी बातें समझने बुझने के बाद चीकू की मम्मी को भरोसा दिलाता है कि वह दोनों भाईयों का आलसपन दूर करके रहेगा।


    मंत्री राजमहल में राजा के साथ मिलकर एक प्लानिंग करता है।


    चीकू और मिकू जब खेलकर घर आते है तो उनकी मम्मी उन दोनों को राजादेश के अनुसार राजमहल भेज देती है।


    राजा उन दोनों भाइयों को राज खजाने की रक्षा करने के लिए दोनों भाइयों को सिपाही के पद पर बिठा देते हैं।


    वो इस बात को सुनकर बहुत खुश होते हैं और उनकी खुशी का मानो ठिकाना नहीं होता।


    अगले दिन वो दोनों भाई अपने अपने काम पर लग जाते हैं, लेकिन अपने स्वभाव के अनुसार वो थोड़ी देर में ही गहरी नींद में सो जाते हैं और उनकी इसी लापरवाही और आलकस के कारण राजमहल से लाखों रुपए का खजाना चोरी हो जाता है।


    जैसे ही उन दोनों भाइयों की आंखें खुलती हैं तो वो दोनों मंत्री को अपनी आखों के सामने खड़ा देखते हैं, मंत्री उन दोनों को पकड़कर राजा के पास लेकर जाता है।


    और, राजा उन दोनों को उनकी लापरवाही और आलस के कारण हुई इतनी बड़ी रकम की चोरी के कारण मृत्यु दण्ड की सजा सुनाता है। 


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    राजा मंत्री से उन दोनों भाइयों को शेर के आगे डालने के लिए कह देता है।


    मृत्युदंड की बात सुनकर दोनों भाइयों के कान खड़े हो जाते हैं और जोर जोर से रोने लगते हैं और राजा से बार बार क्षमा याचना मांगने लगते हैं।


    आखिर में दोनों भाइयों को अपनी गलती का अहसास हो जाता है और वो अब हर काम को ईमानदारी से और ध्यान से मन लगाकर करते हैं और उन दोनों की मम्मी भी मंत्री के काम से बहत खुश है।


    सीख 
    (Moral of the story)


    हमें आलस नहीं करना चाहिए, हमें हर काम को मन लगाकर और पूरी मेहनत से करना चाहिए। हमें आलस शब्द को अपने दिमाग की डिक्शनरी से हमेशा के लिए उखाड़ फेंक देना चाहिए क्योंकि आलस हमें लापरवाह और निकम्मा बनाता है।




    कोरोना का डर (Best Motivational Story)


    स्कूल अब खुलने वाले थे, पूरे एक साल बाद अब स्कूल खुल रहे थे परंतु कोई बच्चा स्कूल जाने के लिए तैयार नहीं था। सारे बच्चे कोरोना के प्रभाव से बहुत ही ज्यादा डरे हुए थे।


    चीकू और रिंकी की मम्मी ने बड़ी ही मुश्किल से दोनों भाई बहनों को स्कूल के लिए तैयार किया और पापा के साथ स्कूल के लिए भेज दिया।


    दोनों ही बच्चे पूरे रस्ते रोते रोते स्कूल जा रहे थे। स्कूल के पास पहुंचते ही चौकीदार ने बच्चों के पापा को रोक लिया और उन्हें दोपहर में 1 बजे बच्चों को ले जाने के लिए कहा। बच्चे रोनी सी शकल लेकर पापा को देखे जा रहे थे।


    शर्मा सर बच्चों की क्लास ले रहे थे। सभी बच्चे एक एक डेस्क पर सोशल डिस्टेंसिंग के कारण अलग अलग बैठे थे और उनके बहुत से यार दोस्त भी स्कूल नहीं आए थे।


    मास्टर जी अपनी क्लास में इंग्लिश पढ़ा रहे थे परंतु किसी भी बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा था क्योंकि सारे बच्चे कोरोना से बहुत ही ज्यादा डरे हुए थे।


    मास्टर जी बच्चों के हाव भाव देखकर पूरी कहानी समझ जाते हैं और पढ़ाई छोड़कर, उन्हें एक महापुरुष की कहानी सुनाते हैं।


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    सभी बच्चे कहानी सुनने लगते हैं। सभी बड़े ध्यान से कहानी सुनते हैं।


    मास्टर जी बच्चों को स्वामी विवेकानंद की कहानी सुनाते हैं।


    एक बार स्वामी जी जंगल से गुजर रहे होते हैं कि कुछ बंदर स्वामी जी के पीछे पड़ जाते हैं और स्वामी जी जोर जोर से भागने लगते हैं। स्वामी जी बड़ी देर तक भागते हैं लेकिन बंदर उनका पीछा ही नहीं छोड़ते।


    तब ही मन ही मन स्वामी जी सोचते हैं, क्योंकि मैं इन बंदरों से डर रहा हूं इसलिए ये मुझे भगा रहे हैं। तब ही अचानक स्वामी जी एक बड़ा सा लठ उठाकर उन बंदरों के सामने खड़े हो जाते हैं और सारे बंदर एक दम से भाग जाते हैं।


    मास्टर जी बच्चों से कहते हैं देखा बच्चों स्वामी जी ने कैसे डर का सामना करा। ठीक ऐसे ही हमें भी कोरोना से लड़ना है और अपने दोस्तों को भी स्कूल लाना है।


    अब सारे बच्चें बगैर डरके अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर देते हैं।



    सीख 

    (Moral of the story)


    हमें किसी चीज़ से डरना नहीं चाहिए बल्कि हमें अपने डर का सामना करना चाहिए।


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    अपनी वैल्यू को बढ़ाओ


    आपको हमारी motivational story in hindi पढ़के कैसे लगी shankibhatia1998@gmail.com पर अपनी राय दे सकते हैं और कमेन्ट बॉक्स में comment भी कर सकते हैं।

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    1 Comments

    1. very nice story keep it up

      check out my blog

      https://mazzme.blogspot.com/2021/04/Rohit-Sharma-ke-shatak.html

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